हिसार की लोकसभा सीट के उपचुनाव का परिणाम कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश के लिए सम्भावित था. हालाँकि कांग्रेस उसके प्रत्याशी की हार के लिए अन्ना फेक्टर को उत्तरदायी नहीं मानती है. हार के पीछे प्रत्याशी की कमजोरी, विजयी प्रत्याशी का पूर्व मुख्यमंत्री का पुत्र होना, हिसार में स्वयं कांग्रेस पार्टी का जनाधार, जातिगत समीकरण आदि बातों को गिनाई जाएगी. जो अक्सर होता है. जहाँ तक भाजपा का सवाल है एक राजनितिक दल होने के नाते वह भी उसकी जीत के पीछे अन्ना फेक्टर को नकार रही है. विजयी प्रत्याशी कुलदीप विश्नोई स्वयं जीत का कारण उनकी स्वच्छ छवि एवं भजनलाल के योगदान को होना बता रहे हैं.
हिसार के चुनाव परिणाम के पीछे अन्ना फेक्टर का कितना योगदान रहा है यह स्वयं ही सिद्ध हो चुका है. मेरा ऐसा मानना है कि यदि अन्ना फेक्टर नहीं भी होता तो भी कांग्रेस के लिए कोई दूसरा परिणाम नहीं निकलने वाला था. इसके कई कारण हैं. उदाहरण के लिए बड़े बड़े घोटाले, कमजोर प्रधानमंत्री, पार्टी स्तर पर वरिष्ठ मंत्रियों एवं नेताओं में सामंजस्य का अभाव, महंगाई, पेट्रोल-गैस का बार बार दाम बढ़ना, छोटे स्तर पर भ्रष्टाचार, प्रशासनिक पकड़ का अभाव, अन्ना का जन आन्दोलन, बाबा रामदेव के प्रदर्शन में लाठीचार्ज, जनलोकपाल बिल पर ढुलमुल नीति आदि ऐसे कारण हैं जो सीधे-सीधे आम जनता की भावनाओं को प्रभावित करते हैं जिन्हें कांग्रेस पार्टी के साथ साथ भाजपा-हजकां भी जानबूझकर अनदेखा कर रही है.
राजनितिक दल एवं नेता आज भले ही हिसार के चुनाव परिणाम में अन्ना फेक्टर को नकार दे परन्तु अन्ना के जन आन्दोलन के कारण आम जनता ने हिसार एवं अन्य जगहों पर हुए उपचुनावों के परिणामों के रूप में केंद्र में सत्तारूढ़ दल के प्रति अपने गुस्से एवं असंतोष का इजहार कर दिया है. अब बारी राजनेताओं की है कि इसे वे स्वीकारते हैं या नकारते हैं.
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